दुर्ग: भिलाई में ऑनलाइन निवेश के नाम पर साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और समाजसेवी सुधा मूर्ति जैसे चर्चित नामों का इस्तेमाल कर एक निवेश योजना को भरोसेमंद दिखाया और रिटायर्ड BSP कर्मचारी से 45 लाख रुपये से ज्यादा की रकम ऐंठ ली।भिलाई नगर थाना पुलिस ने मामले में मध्य प्रदेश के बैतूल से 24 वर्षीय विशाल नागले को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी की भूमिका ठगी की रकम से जुड़े बैंक खाते में सामने आई है। इस पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड और अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

फेसबुक पर दिखा निवेश का विज्ञापन, बड़े नाम देखकर पीड़ित को हुआ भरोसा

पीड़ित जयंत बागची भिलाई के हुडको क्षेत्र के रहने वाले हैं और भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वह भारतीय सेना में भी सेवा दे चुके हैं। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक 10 मार्च 2026 को फेसबुक चलाते समय उन्हें ऑनलाइन निवेश से संबंधित एक विज्ञापन दिखाई दिया।विज्ञापन में निर्मला सीतारमण, सचिन तेंदुलकर और सुधा मूर्ति जैसे चर्चित चेहरों के नाम का इस्तेमाल किया गया था। इसे देखकर जयंत बागची को निवेश योजना वास्तविक और सुरक्षित लगी। उन्होंने विज्ञापन में दिए गए लिंक पर जाकर अपना पंजीयन कर दिया।

महिला ने वरिष्ठ नागरिक बताकर मांगी फीस, फिर शुरू हुआ पैसों का सिलसिला

पंजीयन के बाद पीड़ित की बातचीत कृतिका नाम की महिला से हुई। उसने खुद को निवेश प्रक्रिया से जुड़ा बताते हुए वरिष्ठ नागरिक होने के आधार पर 18,998 रुपये पंजीयन शुल्क जमा करने को कहा। पीड़ित ने ऑनलाइन भुगतान कर दिया।इसके बाद अलग-अलग लोगों ने उनसे संपर्क करना शुरू किया और निवेश, ट्रेडिंग, मार्जिन तथा अन्य शुल्क के नाम पर लगातार रकम जमा कराई गई।

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर बड़े मुनाफे का झांसा

पुलिस के अनुसार पंजीयन के बाद सिद्धार्थ विपुल नामक व्यक्ति ने खुद को अकाउंट मैनेजर बताते हुए पीड़ित से संपर्क किया। उसने ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश से भारी मुनाफा मिलने का दावा किया।पीड़ित को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि संबंधित कारोबार ब्रिटेन, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में संचालित होता है। इसके बाद अलग-अलग तारीखों पर रकम जमा कराई गई।17 मार्च को 1 लाख रुपये और 24 तथा 25 मार्च को 5-5 लाख रुपये जमा कराए गए। इसके बाद मार्जिन बढ़ाने के नाम पर भी अतिरिक्त रकम मांगी गई।

गोल्ड और ऑयल ट्रेडिंग का लालच देकर एक ही खाते से लाखों निकलवाए

26 मार्च को पीड़ित की बातचीत करण तनेजा नाम के व्यक्ति से कराई गई। पुलिस के मुताबिक उसने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव का हवाला देते हुए सोने की कीमत बढ़ने की बात कही और गोल्ड ट्रेडिंग में निवेश को फायदे का सौदा बताया।इसके बाद 27 मार्च को पीड़ित ने 25 लाख रुपये और जमा कर दिए। 9 अप्रैल को ऑयल ट्रेडिंग के नाम पर 5 लाख और 16 अप्रैल को 4 लाख रुपये जमा कराए गए।इस तरह पंजीयन शुल्क समेत पीड़ित से कुल 45 लाख 18 हजार 998 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा करवाए गए।

फर्जी मुनाफा दिखाकर बनाया भरोसा, खाते में दिखाई करोड़ों की रकम

जब पीड़ित ने निवेश की रकम वापस मांगनी शुरू की तो ठगों ने नया तरीका अपनाया। उन्हें बताया गया कि ट्रेडिंग अकाउंट बंद करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।इसके बाद उनके कथित ट्रेडिंग अकाउंट में 2,71,275.68 अमेरिकी डॉलर की रकम लाभ और मूलधन के तौर पर दिखाई गई। पीड़ित ने करीब 2,70,000 अमेरिकी डॉलर निकालने के लिए अपने बैंक खाते की जानकारी भी साझा कर दी।ठगों ने इसे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन बताते हुए रकम खाते में पहुंचने के लिए दो से तीन दिन का समय लगने की बात कही।

टैक्स के नाम पर मांगे 34 लाख, फिर 12 लाख पर आ गई मांग

इसके बाद अप्रैल में जब पीड़ित ने रकम के भुगतान के बारे में जानकारी ली तो ठगों ने एक और बहाना बना दिया। उन्होंने कहा कि 2,70,000 अमेरिकी डॉलर की रकम निकालने के लिए 15 प्रतिशत टैक्स देना होगा, जिसकी राशि 34 लाख रुपये से अधिक है।पीड़ित ने टैक्स की रकम काटकर बाकी पैसा देने की बात कही। इसके बाद कथित आरोपियों ने अपनी मांग घटाकर 12 लाख रुपये कर दी और दावा किया कि रकम जमा होते ही आंशिक भुगतान किया जाएगा।समीर नाम के एक अन्य व्यक्ति ने भी पीड़ित से संपर्क कर टैक्स जमा करना जरूरी बताया।

अरुणाचल प्रदेश के बैंक खाते में RTGS की मांग ने खोला ठगी का शक

22 अप्रैल को आरोपियों ने दावा किया कि पीड़ित की रकम भुगतान के लिए तैयार है और टैक्स जमा करते ही पैसा मिल जाएगा। इसके लिए उन्हें अरुणाचल प्रदेश स्थित एक बैंक खाते में RTGS करने को कहा गया।यहीं से पीड़ित को पूरे मामले पर संदेह हुआ। उन्हें एहसास हुआ कि निवेश के नाम पर उनके साथ साइबर धोखाधड़ी की जा रही है। इसके बाद उन्होंने तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और संबंधित बैंक को भी जानकारी दी।

बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से बैतूल तक पहुंची पुलिस

शिकायत मिलने के बाद भिलाई नगर पुलिस ने BNS की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने रकम के ट्रांजेक्शन, बैंक खातों, मोबाइल गतिविधियों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच की।तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को आरोपी तक पहुंचने वाले महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके बाद पुलिस टीम मध्य प्रदेश के बैतूल पहुंची और 24 वर्षीय विशाल नागले को गिरफ्तार कर लिया।

9वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ मजदूरी करने वाला आरोपी, खाते में पहुंची ठगी की रकम

पुलिस के अनुसार विशाल नागले 9वीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ चुका है और मजदूरी करता है। वर्ष 2020 में वह मजदूरी के सिलसिले में पुणे गया था। पुलिस का कहना है कि इसी दौरान उसके नाम से एक ऑनलाइन अकाउंट खुलवाया गया था और ठगी से जुड़ी रकम उसके खाते में पहुंची।हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी की भूमिका क्या थी और वह इस साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क से किस तरह जुड़ा हुआ था।

चेकबुक, आधार कार्ड और मोबाइल जब्त, अब मास्टरमाइंड की तलाश

पुलिस ने आरोपी के पास से चेकबुक, आधार कार्ड और कथित तौर पर ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद किया है। अब जांच का अगला फोकस उन बैंक खातों पर है, जिनमें पीड़ित की रकम ट्रांसफर की गई।पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई और विज्ञापन में बड़े सार्वजनिक चेहरों के नाम का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया। मामले के कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।

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