भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) के गठन में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नया आदेश जारी किया है। अब प्राधिकरण की कमान परिवहन विभाग के सचिव के बजाय अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी के हाथों में होगी। वहीं परिवहन आयुक्त को प्राधिकरण का सदस्य बनाया गया है। यह निर्णय हाई कोर्ट में दायर याचिका के बाद सामने आया है।

मोटरयान अधिनियम के तहत जारी हुई नई अधिसूचना

राज्य सरकार ने मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 68 के तहत नई अधिसूचना जारी करते हुए पहले के आदेश को निरस्त कर दिया है। नए आदेश के अनुसार पूरे प्रदेश में राज्य परिवहन प्राधिकरण का पुनर्गठन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके तहत अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को अध्यक्ष बनाया जाएगा, जबकि परिवहन आयुक्त सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी में किया गया बदलाव

अब तक परिवहन विभाग के सचिव ही राज्य परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सरकार के नए फैसले के बाद इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। माना जा रहा है कि इससे प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बेहतर विभाजन होगा और प्राधिकरण के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी।

परिवहन सचिव के पास थीं कई अहम जिम्मेदारियां

परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह पहले से कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह परिवहन विभाग के सचिव होने के साथ मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम और मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रबंध संचालक भी हैं। इसके अलावा राज्य परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष का दायित्व भी उनके पास था।

सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गठित सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के पदेन अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रबंध संचालक के पास है।

हाई कोर्ट में उठा था नियुक्ति का मुद्दा

राज्य परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंचा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य सचिव से जवाब तलब किया था। याचिका में एक ही अधिकारी के पास कई महत्वपूर्ण पद होने पर सवाल उठाए गए थे।

हितों के टकराव का दिया गया तर्क

याचिका में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 68 का हवाला देते हुए कहा गया कि एक ही अधिकारी के पास कई जिम्मेदारियां होने से हितों के टकराव की स्थिति बन सकती है। साथ ही लाभ के पद से जुड़े सवाल भी उठाए गए। अदालत में इसी आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।

ट्रांसपोर्टर की याचिका के बाद लिया गया फैसला

यह याचिका ट्रांसपोर्टर अजय नारायण पाठक ने हाई कोर्ट में दायर की थी। याचिका क्रमांक 36062 पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार ने राज्य परिवहन प्राधिकरण का पुनर्गठन करने का निर्णय लिया। माना जा रहा है कि नए आदेश से अध्यक्ष पद को लेकर उठे कानूनी और प्रशासनिक विवादों का समाधान करने की कोशिश की गई है।

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