चेक बाउंस के मामलों की लंबी फेहरिस्त, कई न्यायालयों में मामले लंबित

राजपुर न्यायालय क्षेत्र में चेक बाउंस के 14 प्रकरणों में ₹80.56 लाख विवादित

14 अगस्त तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया, प्रकरण में आगे की विवेचना जारी

बलरामपुर/राजपुर। एससी/एसटी एक्ट व धोखाधड़ी के मामले में फरार चल रहे 'कथित पत्रकार' संतोष सोनी को राजपुर पुलिस ने अंबिकापुर से गिरफ्तार कर शनिवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे 14 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध राजपुर थाना के अपराध क्रमांक 118/2026 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 296 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(द) एवं 3(1)(ध) के तहत अपराध दर्ज है।

जानकारी के अनुसार ग्राम महुडांड़ बासेन निवासी एवं वर्तमान में राजपुर बीट के नरसिंहपुर में पदस्थ वनरक्षक राकेश प्रसाद लकड़ा ने राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार वर्ष 2023 में स्कॉर्पियो वाहन क्रमांक CG 15 CW 1510 का सौदा ₹4 लाख 25 हजार में हुआ था। आरोपी द्वारा ₹2 लाख का भुगतान किया गया, जबकि शेष ₹2 लाख 21 हजार के भुगतान के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का चेक दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में आरोपी ने खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने की बात कहते हुए चेक बैंक में जमा नहीं करने को कहा और लगातार भुगतान टालता रहा। शिकायत के अनुसार 12 मई 2026 को राजपुर स्थित आरोपी की दुकान पर बकाया राशि मांगने पहुंचने पर आरोपी ने कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की तथा भुगतान करने से इनकार कर दिया। शिकायत के आधार पर राजपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।

गिरफ्तारी वारंट के बाद तेज हुई तलाश

पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी तथा एसडीओपी आशीष कुंजाम के मार्गदर्शन में पुलिस टीम आरोपी की लगातार तलाश कर रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से झारखंड एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न ठिकानों में स्थान बदल बदल कर फरार था। इसी दौरान बलरामपुर न्यायालय से एक अन्य चेक बाउंस के प्रकरण में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने अपनी जांच तेज करते हुए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी। तकनीकी साक्ष्यों एवं मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर आरोपी के अंबिकापुर में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी एक्ट) के समक्ष पूर्व में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किया था, जिसे न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया। गिरफ्तारी के बाद शनिवार को आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड प्राप्त कर जेल भेजा गया, प्रकरण में विधि अनुसार आगे की कार्रवाई जारी है।

जांच में कई अन्य मामलों की भी जानकारी

पुलिस कि विवेचना के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी लोगों से सामान उपलब्ध कराने के नाम पर रुपये लेकर पूरा सामान नहीं देता था तथा भुगतान के लिए ऐसे चेक देता था जिन खातों में पर्याप्त राशि नहीं होती थी। पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध पूर्व से भी कई लाख रुपये से जुड़े धोखाधड़ी एवं चेक बाउंस के मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं तथा बलरामपुर न्यायालय से उसके विरुद्ध वारंट भी जारी था।पुलिस ने बताया कि विवेचना पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता को देखते हुए आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से 14 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड स्वीकृत किया गया।

राजपुर न्यायालय क्षेत्र में 14 चेक बाउंस प्रकरण, ₹80.56 लाख की विवादित राशि

प्रकरण से जुड़े दस्तावेज़ों के अनुसार आरोपी संतोष सोनी के विरुद्ध राजपुर न्यायालय से संबंधित 14 चेक बाउंस प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें कुल ₹80 लाख 56 हजार की विवादित राशि का उल्लेख है। दस्तावेज़ों में विभिन्न परिवाद क्रमांक, संबंधित न्यायालय तथा राशि का विवरण भी संलग्न है। इसके अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर यह जानकारी भी सामने आती रही है कि बलरामपुर, रामानुजगंज, अंबिकापुर एवं सूरजपुर सहित अन्य न्यायालयों में भी आरोपी से जुड़े दर्जनों प्रकरण विचाराधीन हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाहन खरीद-बिक्री, व्यावसायिक लेनदेन तथा अन्य भुगतान के मामलों में दिए गए कई चेक बाउंस होने से अनेक विवाद उत्पन्न हुए। उनका कहना है कि ऐसे मामलों से कई लोग आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं।हालांकि, इन सभी मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालयों द्वारा किया जाना शेष है।

पत्रकारिता की आड़ में संरक्षण मिलने की चर्चा

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कुछ माह पूर्व एक प्रमुख समाचार पत्र ने संतोष सोनी को राजपुर क्षेत्र का संवाददाता नियुक्त किया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी मीडिया संस्थान को अपने प्रतिनिधियों की नियुक्ति से पहले उनकी सामाजिक छवि, पेशेवर आचरण और उपलब्ध कानूनी पृष्ठभूमि का समुचित सत्यापन करना चाहिए, ताकि निष्पक्ष एवं ईमानदार पत्रकारिता की साख बनी रहे।

क्षेत्र में कुछ लोगों के बीच यह चर्चा है कि आरोपी को कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों का संरक्षण प्राप्त है, जो आरोपी के पक्ष में स्थानीय स्तर से जिला मुख्यालय तक माहौल बनाने का प्रयास करते हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है यदि भविष्य में इस संबंध में कोई तथ्य या साक्ष्य सामने आते हैं, तो इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

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