

छत्तीसगढ़ : हाई कोर्ट ने वर्ष 2021 से लंबित एक महत्वपूर्ण याचिका में राज्य सरकार की लगातार लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। बिलासपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने स्पष्ट किया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया। अदालत ने अब राज्य सरकार को 10 दिनों का अंतिम समय दिया है और चेतावनी दी है कि तय अवधि में जवाब नहीं आने पर तीन विभागों के सचिवों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा।
सेवानिवृत्त IAS अधिकारी की याचिका पर हुई सुनवाई
यह मामला सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी टी. राधाकृष्णन द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है। उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और छत्तीसगढ़ शासन के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक बार फिर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया।
कोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा- सरकार गंभीर नहीं दिख रही
राज्य शासन की ओर से लगातार समय मांगने पर हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला पिछले कई वर्षों से लंबित है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि इससे प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
कई बार मिला मौका, फिर भी नहीं आया जवाब
रिकॉर्ड के अनुसार राज्य सरकार को पहले 27 फरवरी 2026 को चार सप्ताह का समय दिया गया था। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को फिर चार सप्ताह की मोहलत मिली। 18 जून 2026 को अदालत ने अतिरिक्त दो सप्ताह का समय भी दिया, लेकिन इसके बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया।
10 दिन की अंतिम मोहलत, नहीं तो सचिवों को होना होगा पेश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एमपीएस भाटिया, सीएजी की ओर से अधिवक्ता राजकुमार गुप्ता और राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता केशव गुप्ता उपस्थित रहे।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा में जवाब पेश नहीं किया गया, तो सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिवों को 20 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से हाई कोर्ट में उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई भी इसी दिन निर्धारित की गई है।










