मध्य प्रदेश : दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। सभी प्रमुख दल अपने उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष मिश्रा को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने अनुभवी नेता घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है। तीन बार विधायक रह चुके घनश्याम सिंह पर पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताया है।

दतिया राजपरिवार से है गहरा नाता

घनश्याम सिंह का संबंध दतिया राजपरिवार से है और उन्हें राजपरिवार का संरक्षक माना जाता है। उनके पिता महाराज कृष्णसिंह जूदेव वर्ष 1984 में कांग्रेस के टिकट पर भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। राजनीतिक विरासत के साथ उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

1993 में पहली जीत, कई उतार-चढ़ाव से गुजरा राजनीतिक सफर

घनश्याम सिंह ने 1993 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार दतिया विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर विधायक बने। इसके बाद एक चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला, लेकिन वर्ष 2003 में पार्टी ने दोबारा मौका दिया। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के राजेंद्र भारती को हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की।

हार के बाद बदला क्षेत्र, फिर की वापसी

वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में घनश्याम सिंह को भाजपा के नरोत्तम मिश्रा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सेवढ़ा विधानसभा सीट से चुनावी किस्मत आजमाई, लेकिन 2013 में भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से पराजित हो गए। हालांकि 2018 में उन्होंने दमदार वापसी करते हुए भाजपा उम्मीदवार राधेलाल बघेल को हराकर तीसरी बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया।

2023 में मिली हार, अब उपचुनाव में नई चुनौती

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में घनश्याम सिंह को फिर हार का सामना करना पड़ा। अब कांग्रेस ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए दतिया उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया है। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के बीच होने वाला यह मुकाबला प्रदेश की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल माना जा रहा है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!