रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब और कथित कोल लेवी घोटाले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की चार्जशीट में कई गंभीर दावे किए गए हैं, जबकि कांग्रेस ने पूरी कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए आरोपों को खारिज कर दिया है। मामले की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।

चार्जशीट में कांग्रेस भवन को लेकर गंभीर दावे

ईओडब्ल्यू की पूरक चार्जशीट के अनुसार, जांच में यह दावा किया गया है कि तत्कालीन कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के कार्यकाल के दौरान कथित अवैध लेनदेन का संचालन कांग्रेस भवन से किया जाता था। जांच एजेंसी का आरोप है कि शराब और कोल लेवी से जुड़ी कथित राशि के संग्रह और वितरण में कुछ लोगों की भूमिका सामने आई है।

चार्जशीट में रामगोपाल अग्रवाल, उनके सहयोगी देवेंद्र दड़सेना तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी का दावा है कि कथित अवैध राशि नकद और बैंकिंग माध्यमों से विभिन्न स्तरों पर स्थानांतरित की जाती थी।

पीए की भूमिका पर भी जांच एजेंसी का दावा

जांच एजेंसी के अनुसार, देवेंद्र दड़सेना कथित तौर पर धनराशि प्राप्त करने और उसके वितरण से जुड़े कार्यों का संचालन करते थे। चार्जशीट में कहा गया है कि यह पूरी व्यवस्था वरिष्ठ स्तर के निर्देशों के आधार पर संचालित की जाती थी। एजेंसी ने इन दावों के समर्थन में दस्तावेज और बयान अदालत में प्रस्तुत किए हैं।

शराब घोटाले की जांच में भी सामने आए कथित खुलासे

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए चार्जशीट में दावा किया गया है कि शराब कारोबार से जुड़े कथित अवैध कमीशन का एक हिस्सा राजनीतिक स्तर तक पहुंचता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस संबंध में कुछ गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। हालांकि इन दावों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

कांग्रेस ने बताया राजनीतिक कार्रवाई

कांग्रेस ने रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। उनका कहना है कि मामला न्यायालय में है और अदालत में सच्चाई सामने आएगी।

जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी

शराब, कोल लेवी और अन्य कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच ईओडब्ल्यू और ईडी द्वारा अलग-अलग स्तर पर की जा रही है। कई आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए जा चुके हैं, लेकिन सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

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