अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे तौर पर प्रभावित किया है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जिसके चलते डीजल और पेट्रोल लगातार महंगे हो रहे हैं। अब इस बढ़ते ईंधन संकट की आंच हवाई यात्रा तक पहुंच गई है, जहां विमान कंपनियां अपनी उड़ान सेवाओं में कटौती करने को मजबूर हो रही हैं।

छोटे शहरों की उड़ानों पर सबसे ज्यादा असर

देश की प्रमुख एयरलाइंस जैसे इंडिगो और एयर इंडिया ने लागत बढ़ने के कारण कई छोटे शहरों से उड़ानों की संख्या घटा दी है। इसी कड़ी में जबलपुर भी प्रभावित हुआ है, जहां से मुंबई और बेंगलुरु के बीच चलने वाली उड़ानों में कटौती की गई है।

इंडिगो का नया शेड्यूल, हफ्ते में कम हुई उड़ानें

इंडिगो ने जबलपुर से मुंबई और बेंगलुरु रूट पर उड़ानों का नया शेड्यूल जारी किया है। पहले जहां यह सेवा लगभग रोजाना उपलब्ध थी, अब इसे घटाकर सप्ताह में केवल चार दिन कर दिया गया है। यह बदलाव 16 जून से 30 जून के बीच लागू रहेगा।

नए शेड्यूल के मुताबिक:

  • मुंबई से जबलपुर उड़ानें: मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार
  • बेंगलुरु से जबलपुर उड़ानें: सोमवार, बुधवार, शनिवार और रविवार

कुल उड़ानों में भी आई गिरावट

पहले जबलपुर से सप्ताह में करीब 42 उड़ानें संचालित होती थीं, जो अब घटकर लगभग 36 रह गई हैं। इस कमी का असर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, इंदौर और हैदराबाद जैसे प्रमुख रूट्स पर भी देखा जा रहा है।

एयरलाइंस की दलील: बढ़ती लागत बनी वजह

विमान कंपनियों का कहना है कि लगातार बढ़ते ईंधन खर्च के कारण कई रूट्स पर संचालन महंगा हो गया है। जब तक यात्रियों की संख्या और मांग में सुधार नहीं होता, तब तक उड़ानों की संख्या सीमित ही रखी जाएगी।

अगर आने वाले समय में ईंधन के दाम स्थिर नहीं होते, तो उड़ानों में यह कटौती और लंबी खिंच सकती है, जिससे छोटे शहरों की कनेक्टिविटी पर और दबाव बढ़ेगा।

किराया भी बढ़ा, यात्रियों पर दोहरी मार

उड़ानों में कटौती के साथ-साथ हवाई किराए में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार प्रमुख रूट्स जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, इंदौर और हैदराबाद के टिकट दामों में 4 हजार से 8 हजार रुपये तक का इजाफा हुआ है।

इससे साफ है कि हवाई यात्रा अब पहले से ज्यादा महंगी हो गई है और इसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है।

आगे क्या होगा, इस पर टिकी नजरें

फिलहाल एयरलाइंस ने हालात को अस्थायी बताया है, लेकिन अगर वैश्विक तनाव और तेल की कीमतें इसी तरह बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में हवाई सेवाओं में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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