

मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देशों को भी नहीं मान रहा स्वास्थ्य विभाग! दो-दो स्मरण पत्र के बाद भी राजपुर स्वास्थ्य केंद्र उन्नयन पर चुप्पी
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी से नाराज सरगुजा संभाग अध्यक्ष ने दिया सूचना आयोग, मानवाधिकार आयोग से लेकर न्यायालय तक लड़ाई लड़ने की चेतावनी
रायपुर/अंबिकापुर/बलरामपुर(अभिषेक कुमार सोनी)। बलरामपुर जिले के राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल/उप जिला चिकित्सालय में उन्नयन किए जाने की मांग पर मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देशों की भी अनदेखी स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जा रहा है।एक ओर प्रदेश की साय सरकार “विष्णु का सुशासन” और “विकसित छत्तीसगढ़” जैसे नारों के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का संदेश देने में लगी है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता इन दावों पर पानी फेर रही है।
मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने तथा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी का जवाब नहीं दिए जाने पर ऑल मीडिया प्रेस एसोसिएशन के सरगुजा संभाग अध्यक्ष, छ.ग. श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ राजपुर के प्रवक्ता, संचार टुडे सीजीएमपी न्यूज के स्टेट हेड अभिषेक कुमार सोनी ने मुख्यमंत्री को “अंतिम स्मरण पत्र” भेजते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
इस संबंध में मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर, सरगुजा संभाग आयुक्त, कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बलरामपुर, ऑल मीडिया प्रेस एसोसिएशन के राष्ट्रीय एवं प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ तथा संचार टुडे सीजीएमपी न्यूज के प्रधान संपादक को भी प्रेषित की गई है।

अभिषेक कुमार सोनी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उन्होंने राजपुर क्षेत्र की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था और लगातार बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल/उप जिला चिकित्सालय में उन्नयन करने की मांग मुख्यमंत्री से की थी। इस आवेदन पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने 03 अप्रैल 2026 को आदेश क्रमांक 2500726009952/मु.मं.नि./2026 जारी कर स्वास्थ्य विभाग को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री सचिवालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद आज तक विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल क्यों नहीं हुई? इतना ही नहीं, आवेदक द्वारा लगातार ईमेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से दो बार स्मरण पत्र भेजे जाने के बाद भी विभाग मौन बना हुआ है।
राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सिविल अथवा उप जिला चिकित्सालय में उन्नयन केवल एक औपचारिक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय आवश्यकता बन चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इस विषय को लेकर लगातार आवेदन, ज्ञापन, स्मरण पत्र और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगे जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब तक नहीं दिया गया। यदि वास्तव में सरकार सुशासन की अवधारणा पर काम कर रही है, तो फिर जनता द्वारा उठाए गए इतने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे पर विभागीय चुप्पी समझ से परे है।
RTI में सामने आई स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर,आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्र की जनता सबसे ज्यादा प्रभावित
इस पूरे मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति उजागर कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल बलरामपुर में अब तक ICU, HDU, NICU और PICU जैसी अत्यावश्यक सुविधाएं संचालित नहीं हैं। वहीं पिछले तीन वर्षों में हजारों मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ा।राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के अधिकांश पद रिक्त हैं। सर्जरी, मेडिसिन, स्त्री रोग, शिशु रोग और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ तक उपलब्ध नहीं हैं। सीमित संसाधनों और सुविधाओं के कारण गंभीर मरीजों को अंबिकापुर रेफर करना पड़ता है।
राजपुर क्षेत्र आदिवासी एवं वनांचल इलाका है, जहां हजारों ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग इसी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। लेकिन पर्याप्त डॉक्टर, जांच सुविधाएं और आधुनिक संसाधन नहीं होने के कारण मरीजों को लंबी दूरी तय कर अंबिकापुर जाना पड़ता है। कई बार रास्ते की कठिन परिस्थितियों और देरी के कारण मरीजों की जान तक खतरे में पड़ जाती है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राजपुर स्वास्थ्य केंद्र को सिविल/उप जिला चिकित्सालय में उन्नत किया जाता है तो क्षेत्र की बड़ी आबादी को राहत मिलेगी और गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
विभागीय चुप्पी पर उठे सवाल! सूचना आयोग,मानवाधिकार आयोग और न्यायालय जाने की चेतावनी
अभिषेक कुमार सोनी ने आरोप लगाया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी भी निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध नहीं कराई गई, जो सीधे तौर पर कानून और पारदर्शिता की भावना के विपरीत है।उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मुख्यमंत्री सचिवालय के आदेश पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी जाए,राजपुर स्वास्थ्य केंद्र उन्नयन प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए,विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए,स्वास्थ्य केंद्र को शीघ्र सिविल/उप जिला चिकित्सालय में उन्नत किया जाए तथा लंबित RTI आवेदन का जवाब तत्काल उपलब्ध कराया जाए। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो राज्य सूचना आयोग, मानवाधिका आयोग एवं सक्षम न्यायालय की शरण ली जाएगी जिसका जिम्मेदार संबंधित विभाग होगा।

अभिषेक कुमार सोनी ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़” का सपना केवल बड़े शहरों की परियोजनाओं से पूरा नहीं होगा। विकास का वास्तविक अर्थ तब साबित होगा जब दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं समान रूप से पहुंचेंगी।यदि सरकार वास्तव में “सुशासन” को धरातल पर उतारना चाहती है, तो राजपुर जैसे क्षेत्रों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना ही होगा। अन्यथा जनता के मन में यह सवाल लगातार गूंजता रहेगा कि क्या सुशासन केवल मंचों और नारों तक सीमित होकर रह गया है?मुख्यमंत्री सचिवालय स्तर से निर्देश और स्मरण पत्र जारी होने के बाद भी यदि संबंधित विभाग कार्रवाई के बजाय फाइलों को दबाकर बैठा रहे, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता दोनों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। इससे यह संदेश जाता है कि निचले स्तर पर विभागीय कार्यप्रणाली में न केवल लापरवाही है, बल्कि जनभावनाओं और शासन के निर्देशों की भी अनदेखी की जा रही है।





















