रायपुर : छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े ओवरटाइम भुगतान घोटाले ने एक बार फिर बड़ा मोड़ ले लिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) ने कार्रवाई करते हुए CDL (छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड) के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) एन. उदय राव को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी घोटाले की गहराई और नेटवर्क को और उजागर करती है।

ओवरटाइम और बोनस के नाम पर करोड़ों का फर्जी भुगतान

जांच में सामने आया है कि मैनपावर एजेंसियों के जरिए ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्य दिवसों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा भुगतान सिस्टम एन. उदय राव के निर्देशों पर संचालित किया जा रहा था, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

सिंडिकेट और कमीशन नेटवर्क का खुलासा

इस पूरे मामले में पूर्व आबकारी विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी का नाम भी प्रमुख रूप से सामने आया है। आरोप है कि उनके निर्देशों पर यह धनराशि कारोबारी अनवर ढेबर तक पहुंचाई जाती थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा सिस्टम एक संगठित कमीशन नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था, जिसमें कई स्तरों पर लाभ पहुंचाया जा रहा था।

183 करोड़ रुपये से ज्यादा का फर्जीवाड़ा उजागर

EOW-ACB की जांच के मुताबिक वर्ष 2019 से 2024 के बीच करीब 182.98 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया गया। इसमें विभिन्न श्रेणियों में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं।

ओवरटाइम भुगतान लगभग 101.20 करोड़ रुपये
बोनस लगभग 12.21 करोड़ रुपये
अतिरिक्त चार दिनों का भुगतान लगभग 54.46 करोड़ रुपये
सर्विस चार्ज और टैक्स लगभग 15.11 करोड़ रुपये

जांच में यह भी पाया गया कि वास्तविक भुगतान से कई गुना अधिक बिल तैयार कर राशि निकाली गई, जिसका बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में वितरित किया गया।

इन एजेंसियों के नाम भी जांच के घेरे में

इस घोटाले में कई मैनपावर एजेंसियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें सुमीत फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए टू जेड इन्फ्रासर्विसेस, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशन्स शामिल हैं। इनमें ए टू जेड इन्फ्रासर्विसेस को अकेले 34.07 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिलने की बात सामने आई है।

शराब घोटाले में भी हलचल, दो आरोपियों को जमानत

इसी बीच रायपुर स्थित ईडी की विशेष अदालत ने शराब घोटाले से जुड़े दो आरोपियों पप्पू बंसल और पीयूष बिजलानी को जमानत दे दी है। पप्पू बंसल पर बड़े वित्तीय लेनदेन और घोटाले की रकम के ट्रांसफर में भूमिका निभाने के आरोप हैं।

अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका पर भी जांच तेज

पूर्व में आबकारी विभाग के विशेष सचिव और CSMCL के एमडी रह चुके अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका को लेकर भी जांच एजेंसियां लगातार पड़ताल कर रही हैं। वे इंडियन टेलीकॉम सर्विस से जुड़े अधिकारी रहे हैं और डेपुटेशन पर छत्तीसगढ़ में तैनात थे। अब इस पूरे घोटाले में उनके कनेक्शन को लेकर ईडी की जांच भी तेज हो गई है।

बढ़ता जांच दायरा, कई बड़े नामों पर नजर

लगातार हो रही गिरफ्तारियों और नए खुलासों के बाद यह मामला अब और व्यापक होता जा रहा है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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