

मध्य प्रदेश : स्मार्ट सिटी योजना को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इंदौर में करोड़ों रुपये खर्च कर राहगीरों की सुविधा के लिए लगाई गई आरओ पानी मशीनें अब गायब बताई जा रही हैं, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
3.5 करोड़ की योजना, लेकिन पानी तक नहीं पहुंच पा रही जनता
Indore में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 3.5 करोड़ रुपये की लागत से सार्वजनिक स्थानों पर आरओ मशीनें लगाई गई थीं। इनका उद्देश्य था कि गर्मी के मौसम में राहगीरों को साफ और ठंडा पानी आसानी से मिल सके, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।
मशीनें कहां गईं, किसी के पास जवाब नहीं
याचिकाकर्ता महेश गर्ग ने इस पूरे मामले को लेकर अदालत में सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी मशीनों का कोई अता-पता नहीं है। न तो इनकी मौजूदा स्थिति स्पष्ट है और न ही इनके गायब होने का कोई ठोस जवाब सामने आया है।
हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम से चार हफ्ते में जवाब तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर नगर निगम से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। इसके साथ ही कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन विभाग, निगमायुक्त और संबंधित इंजीनियर शामिल हैं।
गर्मी में जनता बेहाल, स्मार्ट सिटी व्यवस्था पर सवाल
Madhya Pradesh में तेज गर्मी के बीच जब लोगों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। राहगीरों को मजबूरी में पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है, जबकि सार्वजनिक सुविधा के नाम पर लगाई गई मशीनें जमीन पर नजर नहीं आ रही हैं।
रखरखाव का दावा भी सवालों के घेरे में
योजना के अनुसार इन मशीनों का 10 साल तक संचालन और नियमित रखरखाव किया जाना था। लेकिन अब स्थिति यह है कि जब मशीनों का ही कोई पता नहीं, तो उनके रखरखाव का दावा भी सवालों के घेरे में आ गया है।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें, जवाबों से खुल सकता है बड़ा राज
अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 15 जून को तय की गई है। अदालत के रुख और नगर निगम के जवाब पर ही यह स्पष्ट होगा कि आखिर जनता की सुविधा के लिए लगाई गई करोड़ों की मशीनें वास्तव में कहां गईं।




















