नई दिल्ली के Vivek Vihar अग्निकांड की शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को प्रमुख वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के समय में दिल्ली में आग की ज्यादातर घटनाओं के पीछे यही कारण सामने आया है, खासकर उन इमारतों में जहां एसी और हाई लोड उपकरणों का लगातार उपयोग हो रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक शॉर्ट सर्किट कोई अचानक होने वाली घटना नहीं, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होने वाला सिस्टम फेल्योर है। इसकी जड़ में निर्माण के समय खराब वायरिंग, घटिया इलेक्ट्रिकल उपकरण और लोड मैनेजमेंट की अनदेखी होती है।

जांच में यह भी सामने आया है कि बिल्डर फ्लैट्स में लागत कम करने के लिए इलेक्ट्रिकल सिस्टम में समझौता किया जाता है। हर फ्लैट के हिसाब से लोड प्लानिंग नहीं होती और भविष्य के उपकरणों को ध्यान में नहीं रखा जाता, जिससे ओवरलोड की स्थिति बनती है।

एसी को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार एसी खुद समस्या नहीं है, लेकिन गलत वायरिंग और अलग सर्किट न होने की स्थिति में यह सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डालकर आग का ट्रिगर बन जाता है।

घरेलू स्तर पर भी कई लापरवाहियां सामने आई हैं, जैसे एक ही सॉकेट पर कई भारी उपकरण चलाना, पुरानी वायरिंग पर अतिरिक्त लोड डालना और समय-समय पर इलेक्ट्रिकल जांच न कराना। ये सभी कारण धीरे-धीरे ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट को बढ़ाते हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सॉकेट का गर्म होना, जलने की गंध, बार-बार एमसीबी ट्रिप होना और लाइट का झपकना जैसे संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

सुरक्षा के लिए हर एसी के लिए अलग लाइन, सही क्षमता की वायरिंग और नियमित इलेक्ट्रिकल ऑडिट जरूरी बताया गया है। साथ ही अनट्रेंड इलेक्ट्रिशियन से काम कराने और सस्ते उपकरणों के उपयोग से बचने की सलाह दी गई है।

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