रायपुर : आयोजित छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा लाया गया अशासकीय संकल्प स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने सीधे तौर पर अग्राह्य कर दिया, जिससे विपक्ष को बड़ा झटका लगा।

क्या था महंत का प्रस्ताव, क्यों हुआ खारिज?

डॉ. महंत ने महिलाओं के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए मौजूदा व्यवस्था में एक तिहाई आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन स्पीकर ने साफ कर दिया कि विशेष सत्र में केवल पूर्व निर्धारित विषयों पर ही चर्चा की जाती है। साथ ही, जब शासकीय संकल्प पहले ही पेश हो चुका हो, तो परंपरा के अनुसार अशासकीय संकल्प पर विचार संभव नहीं होता।

मुख्यमंत्री का शासकीय संकल्प बना केंद्रबिंदु

इससे पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारी सशक्तिकरण को मजबूती देने के उद्देश्य से संसद और विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने से जुड़ा शासकीय संकल्प सदन में पेश किया।

सदन में नोकझोंक, बयानबाजी से बढ़ा सियासी तापमान

महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली। डॉ. महंत ने पहले निंदा प्रस्ताव लाने की बात का जिक्र किया, जिस पर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताई। स्पीकर ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि सदन के बाहर की बातों को भीतर उठाना उचित नहीं है।

चर्चा की शुरुआत, महिला आरक्षण पर बढ़ी सियासी सक्रियता

इसके बाद भाजपा विधायक लता उसेंडी ने चर्चा की शुरुआत की। पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाला है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!