

नई दिल्ली: देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी को राज्यसभा में करारा झटका लगा है। पार्टी के सात सांसदों के दल बदल को आधिकारिक मंजूरी मिलते ही सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
सभापति की मंजूरी के बाद बदला समीकरण
राज्यसभा सभापति की स्वीकृति के बाद राघव चड्ढा और संदीप कुमार पाठक समेत सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया है। इसके साथ ही राज्यसभा सचिवालय ने इन नेताओं को भाजपा सांसदों की सूची में शामिल कर दिया है।
कौन-कौन गए भाजपा में: बड़े नाम शामिल
भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इस बदलाव ने राज्यसभा की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
भाजपा का मजबूत हुआ संख्याबल
इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में भाजपा सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। इसमें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, जिससे पार्टी की स्थिति और मजबूत हो गई है।
AAP की स्थिति कमजोर: अब सिर्फ 3 सांसद बचे
सात सांसदों के जाने के बाद आम आदमी पार्टी के पास अब राज्यसभा में केवल तीन सदस्य ही रह गए हैं। इनमें संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह शामिल हैं।
संजय सिंह का हमला: बताया गैरकानूनी कदम
दल बदल के बाद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे गैरकानूनी बताया और सभी सात सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की। उन्होंने इस फैसले को लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया।
भगवंत मान का तीखा बयान: गद्दारी का आरोप
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की और इस कदम को विश्वासघात करार दिया।
राजनीतिक असर गहरा: आगे क्या होगा
यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है, वहीं भाजपा के लिए यह राज्यसभा में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने की संभावना है।

































