अंबिकापुर: होली क्रॉस वीमेंस कॉलेज में “इक्कीसवीं सदी में भारतीय पारंपरिक ज्ञान: अंतर्विषयक दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का द्वितीय दिवस भी विचार-मंथन और ज्ञान-विमर्श के साथ संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु से आए विद्वानों की उपस्थिति में भारतीय पारंपरिक ज्ञान की प्रासंगिकता पर गहन चर्चा हुई।

दूसरे दिन आमंत्रित व्याख्यान के तहत शासकीय महाविद्यालय शंकरगढ़ के सहायक प्राध्यापक डॉ. पुनीत राय ने “सभ्यता के संकट और उपनिषदों का संदेश” विषय पर व्याख्यान दिया। इसके साथ ही विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए, जिसमें छात्र-छात्राओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

संगोष्ठी के दो सत्रों में कला, संस्कृति, विज्ञान, चिकित्सा और कृषि जैसे विषयों पर भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर सारगर्भित चर्चा हुई। पर्यावरण अवनयन, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक असमानता जैसी वर्तमान समस्याओं के समाधान में पारंपरिक ज्ञान की उपयोगिता पर भी विचार रखा गया। निष्कर्ष रूप में यह सामने आया कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से देश विकास की नई दिशा में आगे बढ़ सकता है।

कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में चेयरपर्सन के रूप में डॉ. तृप्ति पाण्डेय ने भूमिका निभाई, जबकि प्रतिवेदक के रूप में श्री अकील अहमद अंसारी और सुनील रवानी उपस्थित रहे। संचालन की जिम्मेदारी डॉ. मृदुला सिंह,  लक्ष्मी श्रीवास्तव और  प्रतिभा मिंज ने निभाई। वहीं  प्रज्ञा सिंह ने शोध-पत्र वाचन किया और धन्यवाद ज्ञापन  अंजना द्वारा किया गया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आकाशवाणी अंबिकापुर के एडिशनल डायरेक्टर  परमेंद्र कुमार, गेस्ट ऑफ ऑनर पी.के. शिंदे (एसईसीएल) तथा विशिष्ट अतिथि  फिलोमिना टोप्पो उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय को समय की आवश्यकता बताया। प्राचार्य डॉ.शांता जोसेफ ने कार्यक्रम की सफलता पर सभी का आभार व्यक्त किया।

संगोष्ठी के दौरान छात्राओं द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें उत्कृष्ट कृतियों को पुरस्कृत किया गया। निर्णायक मंडल में डॉ. ऊषा शुक्ला, डॉ. अशोक शुक्ला और डॉ. ममता अवस्थी शामिल रहे।

एसईसीएल के प्रायोजन में आयोजित यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी प्राचार्य डॉ. सिस्टर शांता जोसेफ के संयोजन और उप प्राचार्य डॉ. सिस्टर मंजू टोप्पो के सह-संयोजन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वानों, प्राध्यापकों और छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को सफल बनाया।

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