

अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। बहुचर्चित हंसपुर हत्याकांड की जांच प्रक्रिया को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को दिनभर चली पूछताछ के बाद अब एक नया घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरी जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोपहर से देर शाम तक चले बयान, फिर बंद हुआ दफ्तर..
नोटिस मिलने के बाद पहुंचे ग्राम पंचायत के सचिव, सरपंच, कोटवार, पटेल सहित अन्य ग्रामीणों के बयान दोपहर से लेकर देर शाम तक एसडीएम कार्यालय में दर्ज किए गए। इसके बाद कार्यालय को बंद कर दिया गया। इस पूरी कार्यवाही के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को कैमरे में कैद किया गया है।
मीडिया बाहर, अंदर पहुंचा शिक्षक—उठे गंभीर सवाल..
पूछताछ के दौरान जहां एक ओर पत्रकारों की टीम कार्यालय के बाहर रहकर समाचार संकलन में जुटी थी और उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं थी, वहीं दूसरी ओर एक शिक्षक का बिना रोक-टोक कार्यालय के भीतर प्रवेश करना चर्चा का विषय बन गया।
बताया जा रहा है कि स्कूटी से पहुंचे शिक्षक मनीष सिन्हा, जिन पर पूर्व में कई तरह के आरोप लगाए जा चुके हैं, सीधे एसडीएम कार्यालय के भीतर प्रवेश कर गए और करीब 20 मिनट तक अंदर मौजूद रहे। यह वही शिक्षक हैं, जिनके खिलाफ एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा लिखित शिकायत किए जाने के बाद कमिश्नर कार्यालय के निर्देश पर उन्हें एसडीएम कार्यालय से हटाकर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेज दिया गया था, जहां वे कार्यभार ग्रहण भी कर चुके हैं।
पूर्व एसडीएम से जुड़े आरोपों की भी चर्चा..
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि उक्त शिक्षक का नाम हत्या के आरोपित व निलंबित पूर्व एसडीएम करुण डहरिया से जुड़े मामलों में भी सामने आता रहा है और वे लंबे समय से विभिन्न गतिविधियों में उनके करीबी माने जाते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर अब तक शासन-प्रशासन द्वारा कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की गई है।
अधिकारी निकले, फिर बाहर आया शिक्षक..
उपस्थित पत्रकारों ने आँखो देखा की जांच कार्यवाही पूरी होने के बाद जब एसडीएम अनमोल विवेक टोप्पो और तहसीलदार रॉकी एक्का कार्यालय से निकल गए, उसके लगभग पांच मिनट बाद शिक्षक मनीष सिन्हा भी बाहर आते दिखाई दिए। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। जिसे मोबाईल के कैमरे में वीडियो बनाकर कैद किया गया हैं।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल..
एक ओर मीडिया को दूर रखा जाना और दूसरी ओर एक ऐसे व्यक्ति का अंदर मौजूद रहना, जिसे पहले ही कार्यालय से हटाया जा चुका है - यह स्थिति कई गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है। इस तरह की गतिविधियां जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं। प्रशासन इस पूरे मामले को किस गंभीरता से लेता है और क्या इस पर कोई स्पष्ट जवाब या कार्रवाई सामने आती है, या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह सवालों के घेरे में ही बना रहेगा ?
































