

अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। बहुचर्चित हंसपुर हत्याकांड में अब जांच प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। तहसीलदार द्वारा जारी अधूरे नोटिस के बाद शनिवार को घटनाक्रम ने कई और सवाल खड़े कर दिए, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली और जांच की निष्पक्षता पर संदेह और गहरा गया है।
नोटिस लेकर तहसील पहुंचे ग्रामीण, कार्यालय मिला बंद..
गांव के कुछ ग्रामीण हाथ में नोटिस लेकर कुसमी तहसील कार्यालय पहुंचे, लेकिन शनिवार होने के कारण कार्यालय बंद मिला। इसके बाद उन्हें जानकारी दी गई कि बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया तहसील कार्यालय में नहीं, बल्कि कुसमी के एसडीएम कार्यालय में की जा रही है। यह जानकारी ग्राम पंचायत के सचिव और हल्का पटवारी द्वारा ग्रामीणों को दी गई।
छुट्टी के दिन खुला एसडीएम कार्यालय, वहीं दर्ज हुए बयान..
इसके बाद सभी ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने छुट्टी के दिन कार्यालय खुला पाया। वहां मौजूद एसडीएम कुसमी अनमोल विवेक टोप्पो और तहसीलदार रॉकी एक्का के समक्ष ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए।
खास बात यह रही कि जिस दिन सरकारी अवकाश था, उसी दिन इस जांच के लिए विशेष रूप से कार्यालय खोला गया और कार्रवाई की गई। इसे लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा और संदेह दोनों बढ़ गए हैं।
एक ही विभाग और एक ही कार्यालय में जांच, उठे निष्पक्षता के सवाल..
ग्रामीणों का कहना है कि जिस मामले का संबंध राजस्व विभाग से जुड़ा हुआ है, उसी विभाग के अधिकारियों द्वारा और उसी कार्यालय में जांच कार्यवाही किया जाना कई संदेहों को जन्म दे रहा है। लोगों का मानना है कि इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
जांच के दौरान उच्च अधिकारी अनुपस्थित, मीडिया को भी रखा दूर..
जांच कार्यवाही के दौरान पर प्रभारी एसडीएम अनमोल विवेक टोप्पो के अलावा कोई अन्य उच्च अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। वहीं, इस पूरी प्रक्रिया से मीडिया को भी फिलहाल दूर रखा गया, जिससे पारदर्शिता को लेकर और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
रात में नोटिस तामील, सुबह पेशी—जल्दबाजी या दबाव..
मामले में यह भी सामने आया है कि 9 अप्रैल को नोटिस जारी किया गया, जिसकी तामिली 10 अप्रैल की रात में कराई गई। इसके बाद अगले ही दिन सुबह सभी संबंधितों को उपस्थित होने के लिए कहा गया।
आरोप सामने आये हैं कि इतनी कम समयसीमा में और इस तरीके से बुलाना दबाव बनाने जैसा प्रतीत होता है, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच अधिकारी के ‘कनेक्शन’ पर भी चर्चा..
मामले में एक और पहलू सामने आया है, जिसने पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है। जांच में शामिल एसडीएम अनमोल विवेक टोप्पो वर्तमान में शंकरगढ़ अनुविभाग के साथ-साथ कुसमी अनुविभाग का भी प्रभार संभाल रहे हैं। उन्हें निलंबित पूर्व कुसमी एसडीएम करुण कुमार डहरिया के बाद कुसमी का प्रभार सौंपा गया है। उक्त घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो के वायरल होने की भी चर्चा है, जिसमें एसडीएम अनमोल विवेक टोप्पो को निलंबित एसडीएम करुण डहरिया के साथ एक गीत पर गाते और थिरकते हुए देखा गया बताया जा रहा है। जिस वीडियो में अपशब्द के भी प्रयोग हैं। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि दोनों अधिकारियों के बीच पहले से निकट संबंध रहे हैं, तो क्या जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रह पाएगी?
पहले से विवादों में जांच, अब बढ़ा अविश्वास.
गौरतलब है कि हंसपुर हत्याकांड पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। निलंबित पूर्व एसडीएम करुण डहरिया से जुड़े आरोपों के कारण मामला और गंभीर हो चुका है। ऐसे में अब जांच प्रक्रिया के इस तरीके ने ग्रामीणों के बीच अविश्वास को और बढ़ा दिया है। हालांकि समाचार लिखें जाने तक एसडीएम दफ्तर पूछ ताछ जारी थी. तथा मिडिया को फोटो वीडियो के लिए रोक लगाने की स्थिति भी सामने आई हैं।

































