

तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चले लंबे सैन्य तनाव के दौरान होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक युद्ध के दौरान इस अहम समुद्री मार्ग को नियंत्रित करने के लिए ईरान ने बड़े पैमाने पर बारूदी सुरंगें यानी माइंस बिछाई थीं, जिसका असर अब भी जारी है।
युद्ध के दौरान रणनीतिक कदम
करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए माइंस लगाने का कदम उठाया था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह पूरा क्षेत्र अव्यवस्थित तरीके से माइंस से भर दिया गया था, जिससे अब तक समुद्री सुरक्षा संकट बना हुआ है।
माइंस की सटीक जानकारी नहीं
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ईरान के पास भी इस बात का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है कि उसने किन-किन इलाकों में माइंस बिछाई थीं। इसी कारण इन्हें हटाने की प्रक्रिया बेहद जटिल और धीमी हो गई है।
खतरा अब भी बरकरार
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समुद्री लहरों के कारण ये माइंस अपने स्थान से हटकर अन्य क्षेत्रों में भी पहुंच सकती हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोलने में देरी हो रही है।
सीमित रास्ते से हो रही आवाजाही
फिलहाल ईरान ने स्ट्रेट का एक संकरा मार्ग ही खुला रखा है, जहां से चुनिंदा जहाजों को शुल्क के आधार पर गुजरने की अनुमति दी जा रही है। वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से जहाजों को संभावित खतरे को लेकर लगातार चेतावनी भी जारी की जा रही है।
भविष्य को लेकर अनिश्चितता
विशेषज्ञों के अनुसार जब तक पूरी तरह माइंस हटाने का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना मुश्किल रहेगा। वहीं यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह समुद्री मार्ग पूरी तरह कब सामान्य स्थिति में लौट पाएगा, जिससे वैश्विक तेल और व्यापार पर भी असर बना हुआ है।

































