पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सत्ता और संगठन में बदलाव के बाद लंबे समय तक केवल आवश्यक दौरे ही करते रहे। बीते कुछ समय से वे भोपाल और दिल्ली प्रवास पर अधिक रहे हैं। सत्ता में ढाई साल सीएम बनने की कवायद पूरी नहीं हो पाई, लेकिन उनकी इच्छा अब भी कायम है कि हाईकमान के आदेश पर प्रदेश संगठन का नेतृत्व संभालें।

हालांकि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज अपनी नई टीम बनाने में व्यस्त हैं। वरिष्ठ नेता होने के नाते सिंहदेव के समर्थक सरगुजा और बिलासपुर में भी हैं।

बिलासपुर, कबीरधाम और मुंगेली में दो दिवसीय दौरा

टीएस सिंहदेव ने 5 और 6 अप्रैल को रायपुर से निकलकर बिलासपुर, कबीरधाम और मुंगेली का दौरा किया। उनका रायपुर लौटने का शेड्यूल 6 अप्रैल की रात निर्धारित था।

कांग्रेसी नेता इस दौरे को सिंहदेव के फिर से सक्रिय होने और संपर्क बनाने की कवायद के रूप में देख रहे हैं। इस दौरान उन्होंने न केवल कांग्रेसियों से मुलाकात की, बल्कि कुछ भाजपा नेताओं से भी संवाद किया।

दौरे की प्रमुख मुलाकातें

  • 5 अप्रैल: रायपुर से बिलासपुर, जहां वरिष्ठ भाजपा नेता और बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक के घर पहुंचे। उन्होंने कौशिक के बड़े भाई भुलाऊ प्रसाद कौशिक के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
  • रात्रि विश्राम: कोटा के रेस्ट हाउस में।
  • 6 अप्रैल: लोरमी में पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष पवन अग्रवाल और पूर्व विधायक भूपेंद्र सिंह से मुलाकात।
  • मुंगेली के डिंडौरी में कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में भागीदारी।
  • कबीरधाम के पंडरिया में जिला अध्यक्ष नवीन जायसवाल से मुलाकात।
  • वापसी में मुंगेली में वरिष्ठ कांग्रेसी संजीत बनर्जी से भी भेंट।

व्यक्तिगत मुलाकातों पर जोर

इस दौरे में टीएस सिंहदेव ने विशेष रूप से व्यक्तिगत घरों पर जाकर नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलना अहम माना। दौरे के दौरान उनके पुराने सहयोगियों और पूर्व पदाधिकारियों से भी आत्मीय संपर्क कायम किया गया।

राजनीतिक कयास और प्रतिक्रियाएं

दौरे के समाप्त होने के बाद प्रदेश कांग्रेस में इस पर कयास और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सिंहदेव की यह सक्रियता प्रदेश संगठन और सत्ता समीकरण में संभावित बदलाव की ओर इशारा करती है।

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