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अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी:  जल संसाधन विभाग कुसमी में प्रशासनिक लापरवाही और कर्मचारियों की भारी कमी के चलते आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग में लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे महत्वपूर्ण पद कई वर्षों से रिक्त पड़े हैं, जिसके कारण कार्यालयीन कार्य लगभग ठप स्थिति में पहुंच गए हैं।

जानकारी के अनुसार, इन पदों पर न तो स्थायी नियुक्ति की गई है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किसी कर्मचारी को प्रभार सौंपा गया है। इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। आवक-जावक शाखा में काम कराने आने वाले लोगों को बिना कार्य कराए ही बैरंग लौटना पड़ता है। विभागीय कर्मचारी आवेदकों को यह कहकर लौटा देते हैं कि शाखा में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है।

स्थिति और भी गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि कुसमी जल संसाधन विभाग के अंतर्गत अनुविभाग में अरबों रुपये की लागत से जलाशयों और अन्य परियोजनाओं का कार्य संचालित हो रहा है। इसके बावजूद कार्यालय की जमीनी हकीकत बेहद बदहाल नजर आ रही है। आरोप है कि अधिकारी और सब-इंजीनियर अक्सर कार्यालय से नदारद रहते हैं और परियोजनाओं का हवाला देकर जिम्मेदारियों से बचते हैं।

जल संसाधन विभाग कुसमी में परिस्थितिया निर्मित हुई हैं की किसी भी प्रकार की जानकारी या दस्तावेज प्राप्त करना अब “बालू में तेल निकालने” जैसा कठिन हो गया है। विभागीय कार्यप्रणाली की सच्चाई तब और उजागर हुई जब कार्यालय की स्थिति का वीडियो कैमरे में कैद हुआ, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि करोड़ों-अरबों की योजनाओं का संचालन करने वाले इस कार्यालय की हालत कितनी दयनीय है। हैरानी की बात यह भी है कि कार्यालय परिसर में अधिकारियों की नामावली तक प्रदर्शित नहीं है और न ही सूचना का अधिकार अधिनियम से संबंधित कोई बोर्ड लगाया गया है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस संबंध में जल संसाधन विभाग कुसमी के एसडीओ राजू पैकरा ने स्वीकार किया कि लेखापाल और ऑपरेटर के पद रिक्त हैं तथा इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। उन्होंने यह भी माना कि कार्यालय में अधिकारियों की सूची और सूचना का अधिकार से संबंधित बोर्ड का अभाव है।

प्रशासन इस गंभीर स्थिति को सुधारने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह देखने वाली बात होगी।

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