

बिलासपुर, 4 अप्रैल 2026: शादी-शुदा महिला द्वारा अपनी शिकायत के बाद राज्य महिला आयोग ने एक युवती को उसके पति के साथ कथित अवैध संबंधों के कारण नारी निकेतन में भेजा था। हालांकि, युवती की मां ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बेटी की रिहाई की मांग की। याचिका के बाद जिला प्रशासन ने युवती को नारी निकेतन से रिहा कर दिया।
डिवीजन बेंच ने दी महत्वपूर्ण टिप्पणी
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। बेंच ने स्पष्ट किया कि कोई भी प्राधिकारी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते समय कानून की सीमाओं के भीतर ही कार्रवाई करे। किसी भी वयस्क व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता केवल कानून द्वारा निर्धारित उचित प्रक्रिया के माध्यम से सीमित की जा सकती है।
मामला क्या था
धमतरी जिले की एक शादी-शुदा महिला ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि एक युवती उसके पति के साथ अवैध संबंध में है। आयोग ने दोनों पक्षों को समन जारी कर सुनवाई की और 12 मार्च 2026 को जिला प्रशासन को आदेश दिया कि युवती को रायपुर के नारी निकेतन में रखा जाए। इसके बाद प्रशासन ने युवती को ऑब्जर्वेशन होम रायपुर भेजा।
मां ने चुनौती दी और हाईकोर्ट में याचिका दायर की
युवती की मां ने राज्य महिला आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि युवती मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ है और उसके खिलाफ किसी आपराधिक मामले या हिरासत आदेश की प्रक्रिया नहीं हुई है। अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1995 के तहत किसी बालिग युवती को नारी निकेतन में रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कोर्ट से युवती की रिहाई और मुआवजे की भी मांग की।
आयोग का पक्ष और युवती की रिहाई
हाईकोर्ट की नोटिस पर आयोग ने कहा कि आदेश युवती की सुरक्षा और महिला की शिकायत को ध्यान में रखते हुए दिया गया था। आयोग ने बताया कि आदेश सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने की मंशा से भी जारी किया गया था। राज्य सरकार के लॉ अफसर ने कोर्ट को बताया कि युवती को 30 मार्च 2026 को नारी निकेतन से रिहा कर दिया गया है।

































