

भोपाल। डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय सरकार की NeSDA रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश पूरे देश में डिजिटल गवर्नेंस के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। एमपी में अब 1,752 ई-सेवाओं के माध्यम से नागरिक सरकारी कामकाज आसानी से ऑनलाइन कर सकते हैं, जिससे कार्यालयों के चक्कर और समय की बचत दोनों संभव हुई है।
59 अनिवार्य सेवाओं में 100 प्रतिशत सफलता
मध्य प्रदेश ने 59 अनिवार्य ई-सेवाओं को 100 प्रतिशत लागू कर दिया है। इससे स्पष्ट है कि राज्य डिजिटल गवर्नेंस में तेजी से आगे बढ़ रहा है और नागरिकों को हर स्तर पर सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता बन गई है।
NeSDA रिपोर्ट में देश में स्थिति
केंद्र सरकार की NeSDA रिपोर्ट में ई-सेवाओं की संख्या के आधार पर राज्यों की रैंकिंग जारी की गई। इसमें कर्नाटक 2,102 सेवाओं के साथ पहले स्थान पर है, जबकि मध्य प्रदेश 1,752 सेवाओं के साथ दूसरे स्थान पर है। तीसरे स्थान पर छत्तीसगढ़ (1,645 सेवाएं) और चौथे स्थान पर तमिलनाडु (1,634 सेवाएं) हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार ने नागरिकों को सरकारी कामों के लिए कई घंटों तक दफ्तरों में प्रतीक्षा करने से राहत दी है।
नागरिकों को मिल रही सुविधाएं
एमपी ई-सेवा पोर्टल के माध्यम से अब जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र, आय, जाति, मूल निवासी, लाइसेंस, कर भुगतान और शिकायत जैसी सभी 1,752 सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। यह पोर्टल 56 विभागों की सेवाओं को जोड़ता है, जिससे लोगों को अलग-अलग कार्यालयों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से सरकारी काम संपन्न होने से समय और प्रयास की बचत हो रही है।
बढ़ी पारदर्शिता और भ्रष्टाचार में कमी
डिजिटल सेवाओं के विस्तार से प्रदेश में पारदर्शिता भी बढ़ी है। अब सेवाओं का निपटारा समय पर होता है और भ्रष्टाचार की संभावना भी कम हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह सफलता सरकार की जनहितैषी नीतियों और प्रभावी प्रशासन का परिणाम है। आने वाले समय में मोबाइल आधारित सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, जिससे नागरिकों की सुविधा और बढ़ेगी।
































