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अंबिकापुर: राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर में 23 मार्च से 30 मार्च 2026 तक ‘टीचिंग लर्निंग मेथड’ विषय पर आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम शिक्षकों के प्रशिक्षण और अध्यापन की नई पद्धतियों को समझने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

सात दिवसीय इस कार्यक्रम में उद्घाटन और समापन सत्र सहित कुल 10 शैक्षणिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देशभर के विषय-विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. राजकमल मिश्र ने बताया कि इसमें लर्निंग आउटकम, प्रॉब्लम सॉल्विंग तकनीक, क्रिटिकल एवं एनालिटिकल लर्निंग, प्रश्नपत्र निर्माण, संज्ञानात्मक शिक्षण, शिक्षण भाषा, सहभागिता आधारित शिक्षण तथा ICT और AI तकनीकों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षण पद्धति को अधिक प्रभावी, समावेशी और समयानुकूल बनाना है।

उद्घाटन सत्र में सरगुजा संभाग के क्षेत्रीय अपर संचालक प्रो. रिजवान उल्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल एक महाविद्यालय बल्कि पूरे संभाग के शिक्षकों को नई दिशा देते हैं और उन्हें प्रेरित करते हैं।मुख्य वक्ता के रूप में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. पी.पी. सिंह ने शिक्षण में नवाचार और शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि कॉलेज शिक्षण में गुणवत्ता और नवाचार के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन की बेहतर समझ देने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है।

समापन सत्र में वी.वाई.टी. दुर्ग के पूर्व प्राचार्य प्रो. आर.एन. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि शिक्षक की सोच और उसकी शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है, इसलिए शिक्षण कार्य को केवल नौकरी न समझकर समाज और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण दायित्व मानना चाहिए।

इस कार्यक्रम ने शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार की नई दिशा प्रदान की।

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