


MP News : मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी सरकारी अस्पतालों में NAT टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। अब ब्लड बैंक से खून तभी जारी होगा, जब उसकी जांच NAT मशीन से पूरी हो जाएगी। यह निर्णय सतना जिला अस्पताल में हुई गंभीर घटना के बाद लिया गया है, जहां चार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था।
क्या है NAT टेस्ट और क्यों जरूरी है?
NAT टेस्ट (Nucleic Acid Test) खून की अत्याधुनिक जांच पद्धति है। यह डोनर के रक्त में मौजूद वायरस या संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही पहचान लेता है। पहले सामान्य किट से जांच होती थी, जिसमें संक्रमण का पता देर से चलता था। लेकिन NAT मशीन बेहद सटीक तरीके से हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C, HIV, मलेरिया और सिफलिस जैसी गंभीर बीमारियों का पता लगाती है।
इस जांच से मात्र 15 दिनों के भीतर संक्रमण की पुष्टि की जा सकती है। यानी अब बिना NAT टेस्ट के न तो रक्त ब्लड बैंक में स्वीकार किया जाएगा और न ही मरीज को दिया जाएगा।
फिलहाल भोपाल और इंदौर के सरकारी अस्पतालों में यह मशीन पहले से उपलब्ध है। अब इसे सभी संभागीय मुख्यालय स्थित बड़े अस्पतालों में भी लगाया जाएगा। खास बात यह है कि मशीनें सरकार नहीं, बल्कि निजी कंपनियों द्वारा स्थापित की जाएंगी।
































