बलरामपुर/राजपुर। बलरामपुर जिले के वन परिक्षेत्र राजपुर स्थित गेउर हरितिमा परिसर में वन परिक्षेत्र स्तरीय तेंदूपत्ता शाखकार्तन एवं संग्रहण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्राहकों को वैज्ञानिक पद्धति से शाखकार्तन, उचित संग्रहण, गुणवत्ता संरक्षण तथा वन संरक्षण संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान तेंदूपत्ता संग्राहकों को पत्तों की सही उठाई-कटाई, बंडल बनाने की विधि, मानक गुणवत्ता बनाए रखने तथा निर्धारित समय पर सुरक्षित भंडारण के संबंध में विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर वनों की सुरक्षा एवं आग से बचाव के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य के लिए फड़ अभिरक्षक रंजिता मिंज, सुनीता कुजूर, राजेश खलखो,लीलावती जायसवाल और फड़ मुंशी फुलसुंदरी को सम्मानित किया गया।

उपवनमंडलाधिकारी आरएसएल. श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि वनों को आग से बचाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने पेड़ों की अवैध कटाई रोकने और तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने पर बल दिया। फड़ मुंशी एवं संबंधित कर्मचारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
कार्यशाला में उप प्रबंध संचालक संतोष पांडेय, वन परिक्षेत्र अधिकारी महाजन लाल साहू, जिला अध्यक्ष लघु वनोपज सहकारी संघ अध्यक्ष लालसाय मिंज, वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक सुरेश सोनी,पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक, फड़ मुंशी,वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी,सतीश सिंह,सरपंच एवं अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। कार्यशाला का समापन “वन है तो जीवन है” के संदेश के साथ किया गया।

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