


MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों में मनमानी फीस वसूली और अभिभावकों के शोषण को रोकने के लिए शुल्क अधिनियम 2020 लागू किया है। इस कानून के तहत कोई भी निजी स्कूल तय नियमों से अधिक फीस नहीं वसूल सकता। साथ ही, हर शैक्षणिक सत्र से पहले स्कूलों को अपनी फीस संरचना, पाठ्य-पुस्तकों की सूची और अन्य आवश्यक जानकारी सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। लेकिन हकीकत में कई निजी स्कूल इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग की हालिया समीक्षा में सामने आया है कि भोपाल के करीब 150 निजी स्कूलों ने अब तक न तो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में और न ही ऑनलाइन पोर्टल पर फीस और किताबों की सूची जमा की है। इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग अब ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
मार्च से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है, इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित निजी स्कूलों को 15 फरवरी तक नियमों के अनुसार पूरी जानकारी जमा करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने साफ कहा है कि तय समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले स्कूलों पर जुर्माना, नोटिस और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभिभावकों पर किसी तरह का आर्थिक दबाव न पड़े।
शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों के लिए यूनिफार्म और किताबों को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब कोई भी निजी स्कूल तीन वर्षों तक अपनी यूनिफार्म में बदलाव नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, किताबों और यूनिफार्म पर स्कूल का नाम छपवाना प्रतिबंधित रहेगा, ताकि अभिभावकों को किसी एक दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर न किया जा सके।
शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी निजी स्कूल द्वारा तय दुकान से किताबें या यूनिफार्म बिकते पाए गए, तो संबंधित दुकान का लाइसेंस तत्काल रद्द कर दिया जाएगा। सरकार का साफ संदेश है कि नियमों का पालन हर हाल में कराना होगा और बच्चों की पढ़ाई के नाम पर किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
































