


रायपुर: कांच की बोतल लाखों कबाड़ी लाखों धोने वाले सबके पेट पालने वाला व्यवसाय का एक बड़ा स्रोत है जिसे खत्म करने की कोशिश की जा रही है। पीने वाला ही तो खाली बोतल का पैसा देता है उसे कोई फर्क नही पड़ता बोतल प्लास्टिक की हो या कांच की फर्क कारोबारी को पड़ता है 2 से 3 रुपए की बोतल के बदले 1 से 1,50 पैसे की प्लास्टिक बोतल से करोड़ो रूपए रोज के बचा कर अपने और अपने सहयोगियों के घर भरेंगे। बेशक प्रदेश में हर महीने करोड़ो बोतले सड़क से लेकर खेत तक उड़ती फिरे और जमीन का सत्यानाश करे। वक्त है सरकार इस पर सोचे और खतरनाक प्लास्टिक को जमीन की उपजाऊ क्षमता के नुकसान का कारण बनने से रोके।
पैसे कमाने की जिद धरती के सीने पर भारी न पड़े।
इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव प्लास्टिक के जीवन चक्र के अन्य चरणों में उसके अंतर्ग्रहण और सांस लेने से होने वाले प्रभावों के समान हैं। मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद, सूक्ष्म प्लास्टिक से दीर्घकालिक सूजन, हृदय रोग, मधुमेह, तंत्रिका संबंधी रोग, कैंसर और यहां तक कि स्ट्रोक भी हो सकता है।
छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने आबकारी नीति में किया बदलाव
छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने आबकारी नीति में बदलाव किया है, जिसके तहत अब शराब कांच की बोतलों की जगह प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। हालांकि पर्यावरणविदों ने प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग को लेकर चिंता जताई है। छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने आबकारी नीति में अहम बदलाव किया है, जिसके तहत अब शराब कांच की बोतलों में नहीं, बल्कि प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया जो कि वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होगा।
आबकारी नीति में हुए बदलाव के तहत राज्य में शराब सप्लाई करने वाली सभी शराब बनाने वाली कंपनियों को अपने प्रोडक्ट प्लास्टिक की बोतलों में पैक करने होंगे। सरकार ने कहा कि इस कदम का मकसद सरकारी शराब दुकानों पर कांच की बोतलों के बार-बार टूटने से होने वाले वित्तीय नुकसान को कम करना और कर्मचारियों और ग्राहकों के लिए सिक्योरिटी रिस्क को घटाना है।































