


37 साल पुलिस की सेवा के बाद 31 को रिटायर होंगीं डीएसपी साधना सिंह
रायगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस में महिलाओं की भूमिका बीते एक दशक में निर्णायक रूप से बदली है। जहां पहले पुलिस बल में महिला कार्मिकों की भागीदारी महज 2 प्रतिशत तक सीमित थी।जो अब यह बढ़कर करीब 10 प्रतिशत हो चुकी है। प्रदेश में पुलिस में आ रहे इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर जिले में भी देखने को मिल रही है।जहां महिला पुलिसकर्मी फील्ड ड्यूटी,रात्रि गश्त, नाकाबंदी और कानून-व्यवस्था के साथ मुकदमों की जांच की जिम्मेदारी बखूबी संभाल रही हैं, लेकिन 80 के दशक में जब पुलिस की नौकरी में महिलाओं की राह बहुत मुश्किल थी,उस दौर में दुर्गम वनांचल से निकली एक साधारण परिवार की युवती साधना सिंह को खाकी से इतना प्रेम हुआ कि उसने पुलिस अधिकारी बनने का दृढ़ निश्चय किया और न केवल उसे प्राप्त कर पुलिसिंग के ढेरों नये आयाम गढ़े बल्कि 37 साल तक अविभाजित मध्यप्रदेश व पृथक छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बनी ।
जिले में पदस्थ डीएसपी साधना
सिंह इसी सप्ताह 31 जनवरी को 37 साल की लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्त हों रही हैं।रिटायरमेंट के बाद साधना सिंह धरमजयगढ़ स्थित अपने स्थाई निवास पर कृषि और बागवानी करते हुए अपने परिवार के साथ आगे का जीवन व्यतीत करने का निर्णय लिया है। 20 जनवरी 1964 को एक साधारण परिवार लाईन इंस्पेक्टर ( टेलीफोन ) रामदास उइके के घर साधना सिंह का जन्म हुआ। 6 बहनों मे साधना तीसरी संतान हैं।पढ़ाई के दौरान ही साधना के मन में खाकी वर्दी के प्रति लगाव हो गया था और उन्होने पुलिस अधिकारी बनने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था।एनईएस कालेज जशपुर से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद साधना सिंह एनसीसी में अंडर ऑफिसर बनी। इसके बाद 15 जुलाई 1987 को पुलिस की ट्रेनिंग में शामिल हो गईं।24 दिसंबर 1987 को पासिंग आउट कर साधना सिंह ने पुलिस सब इंस्पेक्टर के तौर पर अपनी सेवा का सफर शुरु किया। साधना सिंह की प्रथम पोस्टिंग जनवरी 1988 में जगदलपुर में सब इंस्पेक्टर के पद पर हुई। उसके बाद क्रमशः बलौदा बाजार,जांजगीर, मस्तूरी,गौरेला,तखतपुर,कांसाबेल, कोरबा,पाली,कुसमुंडा,दर्री में अपनी सेवायें दीं।डीएसपी साधना सिंह ने बताया कि दर्री में पोस्टिंग के दौरान वहां के अव्यवस्थित बदहाल थाना भवन का नवनिर्माण कराया।उसके बाद प्रथम बार रायगढ़ जिले के पुसौर थाना की टीआई का पदभार संभाला। उस समय पूरे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ मे पहली महिला टी आई होने का गौरव साधना सिंह के हिस्से में आया। अपने कर्तव्य की राह पर चलते हुए साधना सिंह की यात्रा सरगुजा,चंद्रपुर,सारागांव, अकलतरा,तमनार आदि थानों मे बतौर निरीक्षक जारी रही।डभरा में एसडीओपी रहते हुए वर्ष 2018 मे उन्हे डीएसपी पद पर प्रमोट किया गया।वर्ष 2019 से 2024 तक डीएसपी साधना सिंह ने मुंगेली में अपनी सेवाएं दीं।दो साल पहले 2024 मे पुनः रायगढ़ जिला मुख्यालय में पदस्थ किया गया। यहां अपने कार्यकाल का पूर्ण विराम कर 31 जनवरी को डीएसपी साधना सिंह रिटायर है रही हैं।
यहां महिला की सफलता के पीछे पुरुष
कहावत प्रचलित है कि हर सफल पुरुष के पीछे किसी महिला का हाथ होता है लेकिन डीएसपी साधना सिंह के मामले में कहावत उलटा है। यहां उनकी सफलता के पीछे एक पुरुष का हाथ है।डीएसपी साधना ने बताया कि उनकी नौकरी और सफलता के पीछे उनके पति शिशुपाल सिंह की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। शिशुपाल सिंह सेवानिवृत्त करारोपण अधिकारी हैं। अपने करीब चार दशकों के कार्यकाल में दो राज्यों में अपनी सेवाएं दे चुकीं डीएसपी साधना सिंह ने पुलिस की नौकरी मे आपराधिक गतिविधियों में संलग्न लोगों पर नकेल कसने एवं उन्हें पकड़कर कानून के हवाले करने मे कुशल भूमिका,मानव तस्करी के खिलाफ कई प्रकरण मे सफलता,जाली नोट पकड़ने में कामयाबी,महिलाओं की सुरक्षा और न्याय, ह्यूमनराइट जैसे अनगिनत मुद्दों पर बढ़चढ़ कर काम किया।एसपी डीएम अवस्थी के कार्यकाल मे रायगढ़ जिले मे आपराधिक गतिविधियों को कंट्रोल करने मे प्रमुख भूमिका रही।अपने नेतृत्व कौशल और प्रशासनिक दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने जहां एक ओर संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकुशलता को प्राथमिकता दी,वहीं दूसरी ओर सहकर्मियों के साथ सहयोगात्मक और प्रेरणात्मक संवाद बनाए रखा ।
डीएसपी साधना सिंंह का शांत, संयमित और संवेदनशील व्यक्तित्व, प्रत्येक स्थिति में संतुलित निर्णय लेने की क्षमता और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण उन्हें एक असाधारण अधिकारी बनाते हैं।चाहे वह कानून – व्यवस्था की चुनौती रही हो या किसी रणनीतिक योजना का क्रियान्वयन—हर परिस्थिति में उन्होंने विभाग को दिशा प्रदान की और एक उदाहरण प्रस्तुत किया।उनका पुलिस की सर्विस मे एक स्वर्णिम कार्यकाल रहा। उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए समय – समय पर उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया गया। डीएसपी साधना को अपनी सेवा पर गर्व है।
अब गृहस्थी के बीच शेष जीवन
करीब 4 दशक तक पुलिस की अनुशासित और संयमित जीवनशैली में रची-बसी डीएसपी साधना सिंह रिटायरमेंट के बाद पूरी तरह गृहस्थी और परिवार के बीच शेष जीवन का आनंद लेने का मन बना चुकी हैं। उन्होंने बताया कि धरमजयगढ के अपने स्थाई निवास पर खेती – बागवानी तथा तीन बच्चों की खुशहाल गृहस्थी के बीच अब उनका सुखमय जीवन आगे बढेगा।साधना सिंह ने अपने संदेश में कहा कि आम जनता की सुरक्षा पुलिस की जिम्मेदारी है।कर्तव्यों के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी जरूरी है।समाज को पुलिस से बड़ी अपेक्षाएं रहती हैं।अपनी इस चुनौती पूर्ण अपेक्षा पर सदैव खरे उतरने का जज़्बा ही पुलिस के परित्राणय साधुनाम को चरितार्थ करता है। सेवानिवृत्त पर महकमे से लेकर हजारों लाखों शुभचिंतकों ने मैडम के स्वस्थ सुखद दीर्घायु जीवन के साथ साथ उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं हैं।




















