

सूरजपुर: जिले में धान खरीदी व्यवस्था की पोल एक बार फिर खुल गई है। ग्राम सोनगरा में हुए भौतिक सत्यापन ने यह साफ कर दिया कि कैसे कागजों में धान और जमीन पर घोटाला चल रहा है।
नायब तहसीलदार एवं संबंधित पटवारी द्वारा किसान फूलबसिया (पति सरजू) के यहां किए गए सत्यापन में चौंकाने वाला अंतर सामने आया। किसान द्वारा 107.2 क्विंटल धान विक्रय का टोकन कटवाया गया था, लेकिन मौके पर महज 5 क्विंटल धान ही पाया गया।जांच में जब सच्चाई सामने आई तो प्रशासन को मजबूरन 102.2 क्विंटल धान का रकबा समर्पित कराना पड़ा। यह मामला केवल एक किसान तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे पूरे धान खरीदी तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि 107.2 क्विंटल का टोकन आखिर किस आधार पर काटा गया?क्या यह बिना मिलीभगत के संभव है?और यदि आज सत्यापन नहीं होता, तो सरकारी रिकॉर्ड में यह फर्जी धान आखिर किसकी जेब भरता?
यह कार्रवाई प्रशासन की सतर्कता जरूर दिखाती है, लेकिन साथ ही यह भी उजागर करती है कि धान खरीदी में भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक फैला हुआ है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों और बिचौलियों पर कब और कैसी कार्रवाई होती है, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।






















