नई दिल्ली। सीबीआई ने पंजाब एंड सिंध बैंक के एक शाखा प्रबंधक और 18 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन पर साइबर अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों से अर्जित 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि को छिपाने और हेराफेरी करने के लिए फर्जी खाते खोलने का आरोप है।

एजेंसी ने प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्रवाई की है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए 13 खाते उजागर हुए हैं।सीबीआई ने पाया कि कई व्यक्तियों ने राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित बैंक की सरकारी ग‌र्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल शाखा में खाते खोलने के लिए फर्जी केवाइसी दस्तावेज, किराया समझौते और अन्य दस्तावेज तैयार करवाए थे।विकास वधवा उस शाखा के प्रमुख थे। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बताया कि जिन 13 फर्मों के नाम पर चालू खाते खोले गए थे, वे अस्तित्व में ही नहीं थीं और जाली दस्तावेजों का उपयोग कर केवल इन चालू खातों को खोलने और संचालित करने के लिए बनाई गई थीं।फर्जी कंपनियों के नाम पर 13 जाली खाते खोले गए
एफआईआर में आरोप है कि इन फर्जी खातों के माध्यम से विभिन्न बैंकिंग चैनलों और डिजिटल प्लेटफार्मों के जरिए हजारों करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण लेनदेन किए गए थे।

इन खातों का इस्तेमाल बाद में साइबर अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन को इधर-उधर भेजने, छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए किया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इसमें शामिल लेनदेन की राशि लगभग 1084.00 करोड़ रुपये है।सीबीआई ने कहा कि वाधवा समेत आरोपितों ने अपने लिए अवैध लाभ कमाया और इसके परिणामस्वरूप पंजाब एंड ¨सध बैंक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।

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