नई दिल्ली/गाजियाबाद: पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही आवारा कुत्तों से संबंधित सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों का स्वागत किया है. विजय गोयल लंबे समय से देश भर में आवारा कुत्तों की समस्या और लगातार लोगों पर आवारा कुत्तों द्वारा किए जा रहे हमले को लेकर आवाज उठा रहे हैं और आंदोलन कर रहे हैं.

दिल्ली एनसीआर के विभिन्न इलाकों में लगातार विजय गोयल द्वारा निवासियों के साथ बैठकों का आयोजन किया जा रहा है. इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों में जाकर आंदोलन को गति देने की कवायद की जा रही है.

विजय गोयल ने बताया, यह उनके लंबे समय से चल रहे आंदोलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस दलील को स्वीकार किया है कि आवारा कुत्तों के हमले से यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग की मृत्यु या चोट होती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित सरकारों तथा सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी होगी. न्यायालय ने यह भी गंभीर प्रश्न उठाया है कि जिन सरकारों ने वर्षों से आवारा कुत्तों की समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, उन पर भारी मुआवजा क्यों न लगाया जाए.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का गोयल ने किया स्वागत: आवारा कुत्तों को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन में लगातार विजय गोयल को आम जनता का सहयोग मिल रहा है. गोयल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाकर पुनः वहीं न छोड़ा जाए, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम द्वारा पकड़े गए कुत्तों को फिर उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब नगर निगम की टीमें कुत्तों को पकड़ने आती हैं, तो तथाकथित कुत्ता-प्रेमी उन्हें रोकते हैं.

दिल्ली में एक भी डॉग शेल्टर का निर्माण नहीं किया गया: उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली नगर निगम द्वारा कुत्तों को खाना खिलाने के लिए जिन स्थानों को चिह्नित किया गया है, वहां अब तक कोई सूचना-पट्ट (बोर्ड) नहीं लगाया गया है, और न ही वहां किसी चौकीदार की व्यवस्था की गई है, जिसके कारण आए दिन झगड़े की स्थिति बनती है. गोयल ने चिंता व्यक्त की कि दिल्ली में अब तक एक भी डॉग शेल्टर का निर्माण नहीं किया गया है, ऐसे में काटने वाले या आक्रामक कुत्तों को आखिर कहां रखा जाएगा. इसी कारण उन्हें पकड़कर फिर उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है.

आवारा कुत्तों को खाना डालने वालों के खिलाफ एफआईआर की मांग: उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम द्वारा माइक्रोचिपिंग का कार्य भी शुरू नहीं किया गया है, जबकि इस संबंध में तीन महीने पहले निर्णय लिया जा चुका है. उन्होंने मांग की कि पार्कों में ऐसे गेट लगाए जाएं, जिससे आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके, ताकि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो. गोयल ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) से अपील की कि वे सड़कों पर आवारा कुत्तों को खाना डालने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश अब स्पष्ट हैं कि सार्वजनिक सड़कों पर कुत्तों को खाना नहीं दिया जा सकता.

उन्होंने बताया कि उनका संगठन ‘लोक अभियान’ शीघ्र ही एक हेल्पलाइन नंबर – 9220-606060 जारी करने जा रहा है, जिस पर लोग नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकेंगे. गोयल ने कहा कि वह स्वयं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगातार सोशल मीडिया पर धमकियां दी जा रही हैं, अपशब्द कहे जा रहे हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “ये लोग न तो कुत्तों को अपने घरों में गोद लेना चाहते हैं और न ही उनकी जिम्मेदारी लेना चाहते हैं, लेकिन मुझे गालियां देने में पीछे नहीं रहते. मेरा उद्देश्य केवल सोसाइटी के बच्चों और नागरिकों की जान बचाना है.”

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