इस्लामाबाद [पाकिस्तान]। पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के समर्थकों ने इस्लामाबाद की ओर बढ़ते हुए शनिवार को लाहौर और मुरीदके में हिंसक प्रदर्शन किए। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, फ़िलिस्तीन के समर्थन में निकाले गए “गाज़ा मार्च” के दौरान टीएलपी और पुलिस के बीच जबरदस्त झड़पें हुईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पंजाब के शेखपुरा ज़िले के मुरीदके में रात के लिए शिविर स्थापित कर दिए हैं। इससे पहले, लाहौर के मुल्तान रोड से शुरू हुआ यह मार्च कई हिस्सों में हिंसक हो गया। पुलिस ने यतीमखाना चौक, चौबुर्जी और आज़ादी चौक जैसे इलाकों में बैरिकेड लगाकर मार्च को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें तोड़ दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने ऑरेंज लाइन मेट्रो ट्रैक पर कब्ज़ा कर लिया और सुरक्षा बलों पर पत्थरबाज़ी की। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को सरकारी वाहनों को कब्जे में लेते और उनका उपयोग जुलूस में करते हुए भी देखा गया।

लाहौर पुलिस के अनुसार, कई अधिकारी घायल हुए हैं, जबकि टीएलपी ने आरोप लगाया कि “पुलिस फायरिंग में कुछ कार्यकर्ताओं की मौत हुई।” हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।

इस बीच, लाहौर की आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने हिंसा और संपत्ति नुकसान के आरोप में 110 टीएलपी कार्यकर्ताओं को 12 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने टीएलपी पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए धार्मिक मुद्दों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक ढाँचे में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन हिंसा और ब्लैकमेल की कोई जगह नहीं।”

टीएलपी, जो 2015 में स्थापित हुई थी, अपने उग्र प्रदर्शनों के लिए जानी जाती है और कई बार पाकिस्तान के प्रमुख शहरों को ठप कर चुकी है।

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