
रायगढ़ : लैलूंगा विकासखंड के ग्राम कोड़केल निवासी किसान आनंद राम सिदार ने पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़ते हुए गेंदा फूल की खेती को अपनाया। उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और एनएचएम की गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लेकर उन्होंने अपनी सिंचित जमीन के एक हिस्से में फूलों की खेती शुरू की। परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर रहा और किसान को करीब 3.41 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
धान से सीमित आमदनी, फूलों की खेती से बढ़ा मुनाफा
आनंद राम पहले 0.400 हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती करते थे। इस क्षेत्र से उन्हें लगभग 10 क्विंटल धान मिलता था। उपज बेचने पर करीब 31 हजार रुपये की आमदनी होती थी। खेती से जुड़े खर्च निकालने के बाद उनके हाथ में लगभग 22 हजार रुपये का लाभ बचता था।वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग ने उन्हें परंपरागत फसल के साथ वैकल्पिक और अधिक लाभ देने वाली फसल अपनाने के लिए प्रेरित किया। विभाग की ओर से गेंदा उत्पादन की तकनीक, फसल प्रबंधन और जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई।
44 क्विंटल गेंदा उत्पादन से मिली 3.96 लाख की बिक्री
विभागीय सलाह के आधार पर किसान ने अपनी 0.400 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर गेंदा लगाया। फसल की नियमित देखरेख और बेहतर प्रबंधन के चलते उन्हें करीब 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन मिला।तैयार फूलों को बाजार में बेचने पर आनंद राम को लगभग 3 लाख 96 हजार रुपये की कुल आय प्राप्त हुई। इस तरह जिस जमीन से पहले धान बेचकर करीब 31 हजार रुपये मिलते थे, उसी क्षेत्र ने फूलों की खेती के जरिए कई गुना अधिक कारोबार दिया।
55 हजार रुपये की लागत के बाद 3.41 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
गेंदा उत्पादन के दौरान किसान को करीब 20 हजार रुपये इनपुट पर खर्च करने पड़े। श्रमिकों पर लगभग 20 हजार रुपये और अन्य कृषि गतिविधियों में करीब 15 हजार रुपये खर्च हुए। इस तरह कुल लागत लगभग 55 हजार रुपये रही।3 लाख 96 हजार रुपये की बिक्री आय में से कुल लागत घटाने पर किसान को करीब 3 लाख 41 हजार रुपये का शुद्ध लाभ मिला। धान की खेती से मिलने वाले लगभग 22 हजार रुपये के लाभ की तुलना में यह अंतर बेहद बड़ा है।
गांव के दूसरे किसानों को भी मिला खेती में बदलाव का संदेश
आनंद राम की सफलता अब गांव के अन्य किसानों के लिए भी उदाहरण बन रही है। गेंदा खेती से बेहतर आमदनी मिलने के बाद किसानों में पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने की दिलचस्पी बढ़ी है।कृषि विभाग का मानना है कि उपलब्ध जमीन और सिंचाई संसाधनों के अनुसार फसल का चयन करने के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाए तो किसान अपनी आमदनी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। तकनीकी मार्गदर्शन और खेती में विविधता का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी कमाई बढ़ाने का रास्ता खोल सकता है।



















