

नारायणपुर: पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) शाखा नारायणपुर में हुए बहुचर्चित बैंक फ्रॉड मामले में नारायणपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बैंकिंग प्रणाली में फर्जीवाड़ा कर ₹30.67 लाख की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह पर पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है।
पुलिस के अनुसार, मामला फर्जी केवाईसी, कूटरचित दस्तावेजों, निष्क्रिय (डॉरमेंट) खातों को पुनः सक्रिय कर अवैध निकासी और फर्जी लेन-देन के जरिए लाखों रुपये की हेराफेरी से जुड़ा है। इस संबंध में थाना नारायणपुर में अपराध क्रमांक 21/2026 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
मामले का खुलासा 5 फरवरी 2026 को पंजाब नेशनल बैंक शाखा नारायणपुर के शाखा प्रमुख मनीष कुमार सोनी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत और बैंक की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर हुआ। जांच में सामने आया कि बैंक कर्मचारी गोपाल सिंह समुंद ने रिकवरी एजेंट और बीसी सेंटर संचालकों तिलकराम मंडावी तथा रामकरण साहू के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा किया।
पुलिस जांच में पता चला कि वर्षों से निष्क्रिय पड़े खातों में पहले एक-एक रुपये जमा कर उन्हें सक्रिय किया गया और बाद में खाताधारकों की जानकारी के बिना आधार लिंकिंग, फर्जी केवाईसी तथा कूटरचित दस्तावेजों के जरिए रकम निकाली गई। ऑडिट में 18 खातों से लगभग ₹8.92 लाख की फर्जी निकासी का खुलासा हुआ।
विवेचना के दौरान यह भी सामने आया कि फर्जी व्यक्तियों को विभिन्न बीसी सेंटरों में ले जाकर खातों से धनराशि निकाली गई। जांच के अनुसार तिलकराम मंडावी के बीसी सेंटर से ₹6.27 लाख और रामकरण साहू के बीसी सेंटर से ₹15.47 लाख की निकासी की गई। इसके अलावा रकम को स्वयं और परिचितों के खातों में ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
मामले में पुलिस पहले ही आरोपी तिलकराम मंडावी और गोपाल सिंह समुंद को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, 23 जून 2026 को पुलिस ने अशोक जैन (30 वर्ष), सुनैना समुंद (24 वर्ष) और रामकरण साहू (33 वर्ष) को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपियों से बैंक पासबुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका, वित्तीय लेन-देन और शेष साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। नारायणपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक अपराधों में शामिल दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।





















