

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने कार्यकाल में ऐसी नेतृत्व शैली विकसित की है, जिसमें जनसरोकार, संवेदनशीलता और प्रशासनिक दृढ़ता का संतुलित समावेश दिखाई देता है। आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित करना, उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देना और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर रुख अपनाना उनकी कार्यप्रणाली की प्रमुख विशेषता बन चुकी है। वर्ष 2026 के सुशासन तिहार के दौरान यह तस्वीर पूरे प्रदेश में स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
गांव-गांव पहुंची सरकार, पेड़ों की छांव में लगी जन चौपाल
सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री ने पारंपरिक सरकारी आयोजनों की औपचारिकता से अलग रास्ता चुना। उन्होंने दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर सीधे लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। सरगुजा, सक्ती, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा और बस्तर सहित कई जिलों में मुख्यमंत्री ने खुले वातावरण में जन चौपाल लगाई, जहां ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बिना किसी झिझक अपनी बातें रख सके।
स्थानीय भाषा और आत्मीय व्यवहार के कारण लोगों को यह महसूस हुआ कि शासन उनके द्वार तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं खुलकर साझा कीं और कई मामलों में तत्काल समाधान की प्रक्रिया शुरू हुई।
आखिरी व्यक्ति तक राहत पहुंचाने पर रहा विशेष जोर
सुशासन तिहार के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जहां मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देकर लोगों की समस्याओं का समाधान कराया। जांजगीर-चांपा के सरखों गांव में लंबे समय से लंबित एक मामले का निराकरण किया गया, जबकि सक्ती जिले के लहंगा गांव में राशन कार्ड संबंधी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित कराया गया।
बालोद और मोहला-मानपुर क्षेत्र में विशेष शिविरों के दौरान एक दिव्यांग महिला को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। ऐसे कई उदाहरणों ने शासन के मानवीय दृष्टिकोण को मजबूत किया।
आदिवासी अंचलों में दिखा संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान
बस्तर संभाग के सुकमा, कोंडागांव और नारायणपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय परंपराओं और जनजातीय संस्कृति के प्रति विशेष सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने आदिवासी आस्था केंद्रों से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा की और स्थानीय परिवारों के साथ बैठकर पारंपरिक भोजन ग्रहण किया।
ग्रामीणों ने इसे केवल सरकारी दौरा नहीं बल्कि आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बताया। कई लोगों ने कहा कि मुख्यमंत्री का व्यवहार उन्हें परिवार के वरिष्ठ सदस्य जैसा महसूस हुआ, जिसने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।
राजस्व और प्रमाण पत्र संबंधी मामलों में तय हुई समय सीमा
मुख्यमंत्री ने सुशासन तिहार से पहले ही जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आम जनता से जुड़े लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। भूमि नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, मनरेगा भुगतान, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण मामलों को प्राथमिकता में रखा गया।
इसके साथ ही शिविरों में प्राप्त नए आवेदनों के समाधान के लिए अधिकतम 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को अपने वैध कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।
लापरवाही पर सख्ती, अधिकारियों को दिया स्पष्ट संदेश
सुशासन तिहार केवल संवाद और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा। विभिन्न जिलों में शिकायतों के आधार पर लापरवाही और उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। इन कदमों ने यह संदेश दिया कि सरकार केवल शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
सुशासन की नई परिभाषा गढ़ने की कोशिश
सुशासन तिहार के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह संकेत देने का प्रयास किया कि प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाना है। जनता से सीधा संवाद, त्वरित समाधान और जवाबदेही तय करने की नीति ने इस अभियान को प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है।





















