

रायपुर : छत्तीसगढ़ भर्ती परीक्षा नकल रोकथाम विधेयक को शुक्रवार को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यावसायिक परीक्षाओं में गड़बड़ी, नकल और घोटालों पर रोक लगाने के लिए लाया गया यह कानून सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के समर्थन से पास हुआ। इस नए विधेयक का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाना है, ताकि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
नए कानून के तहत नकल माफिया, फर्जी अभ्यर्थी और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर 3 से 10 साल तक की सजा और अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं नकल में शामिल अभ्यर्थियों को तीन साल तक किसी भी भर्ती परीक्षा से वंचित रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ भर्ती परीक्षा नकल रोकथाम विधेयक में संगठित अपराध की स्थिति में आरोपियों की संपत्ति जब्त और कुर्क करने का प्रावधान भी शामिल है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चर्चा के दौरान कहा कि युवा राज्य के विकास का केंद्र हैं, लेकिन पहले उनके भविष्य के साथ अन्याय हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पीएससी जैसी संस्थाओं में भ्रष्टाचार और बड़े घोटाले हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी, जिसके बाद कई आरोपी जेल पहुंचे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कानून पीएससी, व्यापमं, निगम-मंडल और सभी भर्ती व व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू होगा।
छत्तीसगढ़ भर्ती परीक्षा नकल रोकथाम विधेयक में जांच की पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत ऐसे मामलों की जांच पुलिस उप निरीक्षक, यानी एसआई स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा। साथ ही परीक्षा आयोजन से जुड़े सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही भी तय की गई है। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सीधा फायदा मिलेगा और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी से बचने की सलाह भी दी।

































